हृदय में चल रही कामनाओं से विश्राम ही कथा का विश्राम है-पं.वासुदेव नंदिनी भार्गव।

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हृदय में चल रही कामनाओं से विश्राम ही कथा का विश्राम है-पं.वासुदेव नंदिनी भार्गव।

शिवपुरी: ऋषि गार्डन गायत्री मंदिर के पास चल रही श्रीमद भागवत कथा के आज विश्राम दिवस के दिन पंडित श्री वासुदेव नंदिनी भार्गव जी ने बताया की कथा का विश्राम होना कथा समाप्त होने का संकेत नही करता क्योंकि कथा का केवल प्रारंभ होता है समापन नही विश्राम का अर्थ है कथा सुनकर हमारे हृदय में चल रही विभिन्न प्रकार की कामना एवं द्वंद से विश्राम मिल जाना। कथा केवल जनता के रंजन के लिए नही होती कथा तो संतो के विलास के लिए होती है ,मन के मंथन के लिए होती है। आज के समय में आए दिन कथा होती ही रहती है, लेकिन इतनी कथा इत्यादि होने के बाद भी उनकी कोई सार्थकता नही है, क्योंकि न तो करने वाले वक्ता ही कथा के महत्व से परिचित हैं, न ही कराने वाले, और भागवत जी में लिखा है कि यदि किसी अनुष्ठान में भाव या प्रेम या श्रद्धा नहीं तो बह वक्ता एवं श्रोता के द्वारा किया गया निराश्रम ही होगा। 




 इस प्रकार बड़े ही आध्यात्मिक ढंग से श्रीमद भागवत कथा के महत्व पर चर्चा करते हुए सुदामा चरित्र की कथा का श्रवण कराया और भगवान की ब्राह्मण भक्ति का निरूपण किया। सुदामा का अर्थ होता है जिसने जीवन में सुदाम कमाया हो पवित्र कमाई जिसके घर में हो, वही सुदामा है अच्छी सद संपत्ति का परिग्रह किया हो न की कुदाम का। साथ ही व्यास पूजन के साथ कथा का विश्राम हुआ। दिनांक 5 नवंबर को कथा के मुख्य यजमान श्री रघुराज सिंह ठाकुर द्वारा "रामकथा" प्रवचन आयोजन रखा गया है आप सभी धर्म प्रेमी बंधुजनों से आग्रह है कि आप सभी पधारकर धर्म लाभ अर्जित करे।

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