माया रुपी आवरण का हरना ही चीर हरण है - पं.वासुदेव नंदिनी

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माया रुपी आवरण का हरना ही चीर हरण है - पं.वासुदेव नंदिनी 

शिवपुरी .शहर में ऋषि गार्डन गायत्री मंदिर के पास फिजिकल रोड पर आयोजित श्री मद भागवत कथा में पंडित श्री वासुदेव नंदिनी भार्गव ने छठवें दिन की कथा में भगवान श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया। भगवान ने ब्रज गोपियों के साथ दिव्य रास क्रीड़ा की, ये वे ही गोपी है जिनका भगवान ने चीर हरण किया मानो वस्त्रों के रूप में भगवान ने माया रूपी आवरण को हर लिया। आवरण का अर्थ है पर्दा जब तक पर्दा बीच में हो तब तक सामने क्या है पता नहीं चलता सामने कौन है गोपियों का आवरण जैसे ही दूर हुआ तो, भगवान का रास प्राप्त हो गया। रास क्या है, रासो वै स: जब रस ही स्वयं रस में डूब जाए तब महारास की उत्पत्ति होती है। मंगलवार को कथा का विश्राम दिवस एवं सुदामा चरित का पावन प्रसंग सुनाया जाएगा यह कथा अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अधयक्ष रघुराज सिंह वैश द्वारा आयोजित की जा रही है 

सभी शिवपुरी नगरवासियों ,कथा के रसिकों से निवेदन है कि कथा में पधारकर पुण्य लाभ अर्जित करे।



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