मधुर गूंज से श्रेष्ठ मना स्वर्गीय विरमानी की मधुरता ही प्रसारित होती है: ऋषि कुमार।
मुरारीलाल विरमानी की पुस्तक मधुर गूंज का हुआ विमोचन।
शिवपुरी: शिवपुरी के वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय मुरारीलाल विरमानी की २५ वी पुण्यतिथि पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सानिध्य में उनकी पुस्तक मधुर गूंज का भव्यता के साथ विमोचन स्थानीय नक्षत्र गार्डन में हुआ।जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मुक्तिबोध शोध पीठ मध्यप्रदेश के निदेशक ऋषिकुमार मिश्रा मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वर्गीय मुरारीलाल विरमानी की पुत्री पूर्णिमा ढिल्लन के वक्तव्य से हुआ,जिसमें अपने पिता स्वर्गीय मुरारीलाल की समस्त खासियतों व उनके जीवन चरित्र को प्रस्तुत किया।अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांत महामंत्री आशुतोष शर्मा ने बताया कि संघ शताब्दी वर्ष में ऐसे साहित्यकार जो गुमनामी के अंधेरे में खोए हुए है,उनको जनमानस के समक्ष प्रस्तुत करना उनकी लेखनी को प्रकट करना यही मूल कार्य है,और यही इस कार्यक्रम का मूल है।अखिल भारतीय साहित्य परिषद में पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री वर्तमान में मुक्तिबोध शोध पीठ मध्यप्रदेश के निदेशक भोपाल से पधारे ऋषिकुमार मिश्रा ने मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि स्वर्गीय मुरारीलाल विरमानी के जीवन पर जब नजर डालते है,तो पता चलता है,आजीवन संघर्ष कर अपनी लेखनी से जनसामान्य के प्रतिदिन के विषयों को ही उनने प्रकट किया।इससे सिद्ध होता है कि वह न सिर्फ संघर्षशील बल्कि मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण व्यक्ति थे।उनकी निर्मलता,और मधुरता को आज मधुर गूंज के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है।
वरिष्ठ लेखक व विचारक प्रमोद भार्गव ने कहा कि शब्द शब्द ब्रह्म होता है,और अपनी इस पुस्तक के माध्यम से विरमानी जी सदैव के लिए जनमानस के बीच अमर हो गए है।इंदौर से आए अरुण अपेक्षित ने कहा कि मैने मुरारीलाल विरमानी के साथ कई गोष्ठियों में सहभागिता की।उनकी लेखनी से हास्य के माध्यम से आम जन की पीड़ा कमजोरी ही उजागर होती थी।साइकिल की दुकान पर जब भी फुर्सत में होते तो कविता लिखने बैठ जाते,कविता उनका प्रेम थी।पुरुषोत्तम गौतम व हरिश्चंद्र भार्गव ने भी विचार प्रकट किए।प्रथम सत्र का संचालन हेमलता चौधरी ने किया।
दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में शिवपुरी के वरिष्ठ कवि डॉ एच पी जैन,झांसी से पधारी कुंती हरीराम,अशोक मोहिते मंचासीन रहे।इस सत्र का संचालन छबि विरमानी व शैलेश विरमानी ने किया।इस काव्य गोष्ठी में प्रदीप अवस्थी,अजय जैन अविराम,श्याम बिहारी सरल,आशुतोष शर्मा ओज,उर्वशी गौतम,अंजली गुप्ता,राकेश विरमानी,रोहित विरमानी,सुषमा अरोरा,ने काव्य पाठ किया।अंत में सभी का आभार शिवानी विरमानी ने ज्ञापित किया।सभी का अंत में पूरे विरमानी परिवार ने स्वागत सम्मान एक साथ में किया।





