शिवपुरी में खाद संकट गहराया: बारिश में भी '4 बोरी' के लिए 12 घंटे का इंतजार, छात्राएं भी स्कूल छोड़ लाइन में लगने को मजबूर।
शिवपुरी। जिले के करैरा क्षेत्र में किसान इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ जहां बेमौसम बारिश ने उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, वहीं अब रबी की बुआई के लिए खाद की किल्लत ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। बीते दो दिनों से हो रही रुक-रुककर बारिश के बावजूद, खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।
एक टोकन पर सिर्फ 4 बोरी: किसानों की मजबूरी
किसानों को फिलहाल एक टोकन पर केवल 4 बोरी खाद ही दी जा रही है, जिसमें 2 बोरी यूरिया और 2 बोरी एपीके (NPK) शामिल हैं। यह मात्रा किसानों की आवश्यकता से काफी कम है, जिसके कारण उन्हें अपनी जरूरत पूरी करने के लिए बार-बार केंद्रों पर आना पड़ रहा है और भीड़ लगातार बढ़ रही है।
सुबह 3 बजे से लाइन, बारिश में भीगते किसान
सोमवार को जिलेभर में तेज बारिश के बीच भी करैरा के केंद्रों पर किसानों की कतारें जस की तस बनी रहीं। कुर्रोल गांव की मानकुंवर जैसी कई महिलाएं सुबह 3 बजे से ही लाइन में लगने के लिए करैरा पहुंच गईं थीं। उन्होंने बताया कि बारिश से परेशानी है, लेकिन खाद के बिना खेती का काम शुरू नहीं हो सकता, इसलिए भीगते हुए भी खड़े हैं।
स्कूल छोड़कर टोकन लेने पहुंची छात्रा
इस भीड़ में सबसे परेशान करने वाला दृश्य यह था कि कई छोटे बच्चे भी अपने माता-पिता के बदले लाइन में खड़े दिखे। कालीपहाड़ी गांव की कक्षा 6वीं की छात्रा माधवी ने बताया कि उसके पिता ने उसे स्कूल की जगह टोकन लेने के लिए सुबह 4 बजे ही भेज दिया था। आठ घंटे तक बारिश में खड़े रहने के बावजूद उसे टोकन नहीं मिल पाया।
जटिल वितरण प्रणाली से त्रस्त किसान
किसानों का आरोप है कि खाद वितरण की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल है। उन्हें पहले टोकन के लिए, फिर भुगतान और रसीद के लिए, और अंत में 3 किमी दूर गोदाम से खाद की बोरियां लेने के लिए कुल तीन बार लंबी लाइनें लगानी पड़ रही हैं। किसान सुबह 4 बजे से शाम तक इसी मशक्कत में फंसे रहते हैं।
किसानों ने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराए और वितरण प्रक्रिया को सरल बनाए, अन्यथा बुआई का महत्वपूर्ण समय निकल जाएगा और खेती के काम पर गंभीर असर पड़ेगा।
