व्यापारिक, राजनीतिक एवं समाजसेवी परिवार की बिटिया आयुषी रघुवंशी का सिविल जज में चयन, हर्ष की लहर।
तय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक बार असफलता के बाद दूसरे अटैम्पट में पाई सफलता।
शिवपुरी- अपने जीवन में तय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हरेक प्रतिभागी पूरे मनोयोग से अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रयास करता है और एक बार नहीं बल्कि वह असफलता को दरकिनार कर आगे बढ़़कर पुन: तय लक्ष्य के लिए तैयारी करता है और आखिरकार लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद जो सुखानुभूति होती है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। कुछ इसी तरह का लक्ष्य हासिल किया शिवपुरी व्यापारिक, राजनीतिक एवं समाजसेवी रघुवंशी परिवार की बिटिया आयुषी रघुवंशी ने जिनका सिविल जज में चयन हुआ और सर्व समाज में हर्ष की लहर फैल गई। बताना होगा कि रघुवंशी परिवार के मुखिया दिवंगत दादा-दादी श्रीमती हीरा देवी-स्व श्री नारायण सिंह रघुवंशी, नरेंद्र रघुवंशी, स्व.सुरेंद्र रघुवंशी , वीरेंद्र रघुवंशी पूर्व विधायक, गजेंद्र रघुवंशी के छोटे भाई जितेन्द्र रघुवंशी (जीतू)राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी श्रीमती प्रीति-मुकेश रघुवशी की होनहार बिटिया आयुषी रघुवंशी का सिविल जज के लिए चयन हुआ है। वर्तमान में आयुषी रघुवंशी जयपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में मणिपाल यूनिवर्सिटी में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत है और जैसे ही सिविल जज परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ वैसे ही समस्त रघुवंशी परिवार में हर्ष की लहर व्याप्त हो गई और आयुषी की इस सफलता पर सभी ने अपनी ओर से बधाईयां प्रेषित की।
आयुषी रघुवंशी के पिता मुकेश रघुवंशी बताते हैं कि शुरू से ही आयुषी ने सिविल जज के लिए लक्ष्य हासिल करते हुए स्वयं के माध्यम से ही तैयारी प्रारंभ की और वह लगातार पहली बार इस परीक्षा को देने के बाद प्री, मैंस और इंटरव्यूज भी क्लीयर होने के साथ ही महज एक प्वाईंट से परीक्षा में असफल रही इसके बाद भी धैर्य नहीं छोड़ा और फिर से तैयारी करते हुए द्वितीय अटैम्पट दिया आखिरकार अपने तय लक्ष्य को हासिल करते हुए दूसरे अटैम्पट में सिविल जज के रूप में चयनित होकर अपनी सफलता को सभी के साथ सेलीब्रेट किया। सुश्री आयुषी रघुवंशी की इस सफलता पर समस्त परिजनों सहित नगर के गणमान्य नागरिक, समाज बन्धुजन, शुभचिंतक सहित शहरवासी शामिल है जिन्होंने सोशल मीडिया, व्यक्तिगत संपर्क करते हुए आयुषी एवं उनके परिजनों को बधाईयां प्रेषित की। बताया गया है कि इस दौरान आयुषी के द्वारा करीब कुछ पुस्तकों का लेखन भी किया गया ।

